Monday, June 15, 2009

सौंदर्य

अंश हूँ मैं भी
प्रकृति का ऐक
प्रेम है मुझे
नैसर्गिक सौंदर्य से
भीतर छुपा है रहस्य कोई
मन बरबस आकर्षित होता है
प्रकृति से
मालूम है मुझे भी
तुम ही हो अंश प्रकृति का
1.1.1988

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