है ये जीवन
समय की विमा के संगत,
भौतिक पृष्ठभूमि पर
खिचने वाली,
चेतना की एक अल्पकालिक लकीर,
लकीर का भौतिक अस्तित्व
अस्थायी है, अंतरिम है
परन्तु संपूर्ण चेतना से,
सुकर्म द्वारा एकत्रित उपलब्धियां ,
देती हैं "आयाम"
एक शाश्वत चेतना के
स्थायित्व को,
जिसकी प्रेरणा से
होता है परिष्कार ।
३०.९.1990
समय की विमा के संगत,
भौतिक पृष्ठभूमि पर
खिचने वाली,
चेतना की एक अल्पकालिक लकीर,
लकीर का भौतिक अस्तित्व
अस्थायी है, अंतरिम है
परन्तु संपूर्ण चेतना से,
सुकर्म द्वारा एकत्रित उपलब्धियां ,
देती हैं "आयाम"
एक शाश्वत चेतना के
स्थायित्व को,
जिसकी प्रेरणा से
होता है परिष्कार ।
३०.९.1990
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