Monday, June 15, 2009

मेरे घर के ऊपर का आकाश

देख सकता हूँ मैं,
अपनी चौखट पर,
भोर के तारे का उज्जवल
प्रकाश,
अरे ! तुम अभी तक बच्चे के
लिए क्रोशिए पर प्रेम की ऊन
गूँथ रही हो, देखो, पीछे के
खेत के झुरमुटों से कुछ मोर ।
दूब की पत्तियों की नोंक पर
ओस की बूंदों ने,
बादलों के घर से आ कर
मेरे घर के आँगन मैं दस्तक दी है,
कोहरे की धुंध मैं मीनारों की लम्बाई
नापती चीलों ने मेरे घर के ऊपर का
आकाश घेर लिया है।
२६.०८.1995

No comments:

Post a Comment